शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

Excess consumption of energy drinks is fatal

ऊर्जा पेय (energy drinks) का अधिक सेवन हानिकारक हैं :



energy drinks
energy drinks





आजकल ऊर्जा पेय (energy drinks) का सेवन बहुत ही प्रचलन में है , खासकर युवओं के लिए यह एक तरह से फैशन (vogue) सा बन गया है वह इसके बिना रह ही नहीं सकते थोड़ी सी थकावट होने पर उन्हें तुरंत ऊर्जा पेय (energy drinks) चाहिए , शायद वह यह नहीं जानते की ऊर्जा पेय (energy drinks) का अधिक सेवन उनके लिए कितना हानिकारक है |ऊर्जा पेय (energy drinks) का असर सबसे ज्यादा युवाओं पर ही होता है क्योंकि युवा ही इसका अधिक सेवन करते हैं थोड़ी सी थकावट होते ही उनको ऊर्जा पेय (energy drinks) चाहिए |


ऊर्जा पेय (energy drinks) क्यों है हानिकारक :


ऊर्जा पेय (Energy drinks) के अधिक सेवन से ब्लड प्रेशर (blood pressure ) बढ़ सकता है और हृदय की गति बाधित हो सकती है ऊर्जा पेय (Energy drinks) में कैफीन, टॉरिन और अन्य उत्तेजक पदार्थों के उच्च स्तरिय हानिकारक तत्व होते हैं और इनके दुष्प्रभाव ब्लड प्रेशर (blood pressure ) बढ़ाते हैं और इससे दिल के दौरे(heart attack) की संभावना बढ़ जाती है ,इसके अलावा जानलेवा अतालता (Arrhythmia) या असामान्य हृदय रोग (Abnormal heart disease) हो सकता है एनर्जी ड्रिंक शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण अंगों को रक्त की पर्याप्त आपूर्ति में बाधा उत्पन्न कर सकता है| अतालता (Arrhythmia) रोग आमतौर पर एक स्वस्थ हृदय में होता है और अक्सर छुपा हुआ रहता है |


अतालता रोग (Arrhythmia) :



heart disease
 heart disease


अतालता (Arrhythmia) रोग अधिक मात्रा में ऊर्जा पेय (Energy drinks) के सेवन से होता है इस रोग का आसानी से पता नहीं लगता अगर आप भी ऊर्जा पेय (Energy drinks) का सेवन करते है तो तुरंत डॉक्टर से चेकअप अवश्य करा लें |अन्यथा आपके जीवन को खतरा हो सकता है |

गुरुवार, 19 सितंबर 2019

Aloe vera is Ayurvedic Medicine



क्या एलोवेरा है एक युर्वेदिक औषधि ?

एलोवेरा कहे या घृतकुमारी ऐसे ही ना जाने कितने ही नाम है इस आयुर्वैदिक संजीवनी के | एलोवेरा का यह छोटा सा पौधा मिल भी बड़ी आसानी से जाता है |आजकल तो घरो में भी एलोवेरा का पौधा देखने को मिलता है | लेकिन इसके औषधीय गुणों के बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं | एलोवेरा का यह छोटा सा पौधा कई औषधीय गुणों से भरा है | इस छोटे से पौधे में कितने आयुर्वैदिक गुण है | आइए जानते है इसके आयुर्वैदिक गुणों के बारे में :-




Aloe vera is Ayurvedic Medicine
 Aloe vera is Ayurvedic Medicine



अगर आप भी चाहते है कि घर बैठे ही आप सुन्दर और स्वस्थ रहे तो एलोवेरा इसमें आपकी बहुत मदद कर सकता है |
एलोवेरा एक बेहतरीन एंटीबायोटिक और एंटीसेप्टिक के रूप में काम करता है | इसमें हमारे शरीर की अंदरूनी सफाई करने एवं हमारे शरीर को अन्दर से रोगाणु मुक्त रखने के गुण मोजूद है |
यह हमारे शरीर की छोटी एवं बड़ी नस तथा नाड़ियो की सफाई बहुत ही अच्छी तरह से करता है |इसके अतिरिक्त एलोवेरा हमारे स्वास्थ के लिए और भी कई प्रकार से लाभकारी है | जैसे :-

वजन कम करता है एलोवेरा :


व्यस्त जीवनशैली , फास्ट फूड और बदलते खान-पान के कारण आज हर व्यक्ति मोटापे की समस्या से ग्रस्त है | एलोवेरा का जूस मोटापा कम करने में बहुत ही सहायक है | इसमें एंटी- इन्फ्लेमेंटरी गुण होते हैं | जो शरीर में चर्बी बढ़ने से रोकते हैं |एलोवेरा का जूस आप आसानी से घर में बना भी सकते हैं | एलोवेरा का एक पत्ता ले और उसकी ऊपरी परत को निकाल दे | पत्ते में मौजूद पीली परत को हटा दें |अब जैल को निकाल कर दो चम्मच जैल में 3 कप पानी डालकर इसे तीन-चार मिनट मिक्सी में अच्छी तरह चटनी के जैसे पीस लें जूस तैयार है | यह प्राकृतिक रूप से वजन घटाने में सहायक है |

एलोवेरा में है रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) :


बदलते मौसम के साथ हमारे में शरीर में भी कई तरह के बदलाव आते हैं | विशेषकर शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति मौसम बदलते ही बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं |शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति को एलोवेरा का जूस रात को सोने से पहले पीना चाहिए |

रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने के लिए एलोवेरा का जूस विशेष लाभदायक है| एलोवेरा जेल और जूस रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाते हैं |

पाचन क्रिया ठीक करता है एलोवेरा :


एलोवेरा का जूस पेट संबंधित सभी परेशानियों से राहत प्रदान करता है | इस जूस में पेट साफ करने के प्राकृतिक गुण मौजूद होते है इसमें लैक्सेटिव होती है जो पाचन क्रिया में सहायक है और पाचन तंत्र को साफ करता है इससे कब्ज में राहत मिलती है जूस के साथ-साथ इसे अन्य रूप में खाने से भी स्वास्थ्य पर अनुकूल असर पड़ता है | कब्ज में एलोवेरा का रस भी फायदेमंद है | इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें |

एलोवेरा दिल को रखे स्वस्थ :



Aloe vera is Ayurvedic Medicine
 Heart Disease




एलोवेरा के प्रतिदिन के सेवन से ह्रदय रोग से बचा जा सकता है | यह शरीर में रक्त को साफ़ करता है और रक्त की मात्रा बढ़ाता है | रक्त प्रवाह को सुचारू बनाए रखता है | यह उच्च रक्तचाप (high blood pressure)को सामान्य बनाए रखता है | जिससे दिल का दौरे (Heart attack) की संभावना कम हो जाती है |

स्मरण शक्ति बढ़ाता है एलोवेरा :


एलोवेरा स्मरण शक्ति बढ़ाता है क्योंकी इसमें सैकराइडस (saccharides) नामक तत्व पाया जाता है | यह स्मरण शक्ति को बेहतर बानाता है और तनाव कम करता है |

बालों का करे पोषण एलोवेरा :


Aloe vera is Ayurvedic Medicine
 black long shiny hair



 

बालों के लिए भी फायदेमंद है |एलोवेरा को अरंडी के तेल के साथ मिलाकर लगाने से बाल बढ़ते हैं बालों का गिरना ,सफेद होना ,रूसी (dandruff) होना ,बालों का रूखापन आदि समस्याएं भी एलोवेरा के उपयोग से खत्म हो जाती हैं | शैंपू करने से पहले बालों में चमेली या नारियल के तेल में एलोवेरा का रस मिलाकर लगाने से बाल मजबूत और चमकदार बनते हैं | आंवला और जामुन के साथ एलोवेरा का उपयोग करने पर बाल मजबूत होते हैं | एलोवेरा के रस में मेहंदी मिलाकर बालों में लगाने से बाल चमकीले और मजबूत होते है |

पायरिया में लाभदायक है एलोवेरा :


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 Dental problem


दांतो के लिए एलोवेरा बहुत उपयोगी है | एलोवेरा मुंह और मसूड़ों संबंधित समस्याओं के लिए अत्यंत लाभकारी है |इसके प्रयोग से मसूड़ों में आई सूजन और मसूड़ों से खून आना बंद हो जाता है खासकर पायरिया हो तो एलोवेरा जेल में मौजूद एंटीबैक्टीरियल ग्रेविटी उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ते हैं एलोवेरा का उपयोग माउथवॉश के तौर पर भी किया जा सकता है |

त्वचा का पोषण करे एलोवेरा :


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  beauty 




एलोवेरा शरीर से विषैले पदार्थ को बाहर निकालकर शरीर के अंदर की सफाई करता है | एलोवेरा - ग्लिसरीन ,सोडियम, कार्बोनेट ,सोडियम पाल्मेट जैसे पोषक तत्वों से भरा होता है |एलोवेरा त्वचा को नमी प्रदान कर उसे मुलायम स्वस्थ और चमकदार बनाता हैं | मिलावटी सौंदर्य प्रसाधनों की तुलना में एलोवेरा का प्रयोग त्वचा के लिए कहीं ज्यादा लाभदायक है | इसमें मौजूद पोषक तत्व और औषधीय गुण कील ,मुहांसों, झुर्रियों , सनबर्न भी राहत पहुचाते है | एलोवेरा ठंडा भी होता है जो त्वचा जलन होने पर ठंडक देता है इसे लगाने पर एक्जीमा की समस्या भी दूर होती है |

चोट लगने पर :



चोट लगने पर एलोवेरा जैल का उपयोग लाभदायक है | एलोवेरा जैल में एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण होते है |यह किसी भी प्रकार के चोट अथवा जलन में आराम देता है | यहां तक की कीड़ो के काटने पर भी जैल लगाने से दर्द और जलन बहुत हद तक कम हो जाती है | अपने एंटी बैक्टेरिया और एंटी फंगल गुण के कारण एलोवेरा घाव को जल्दी भरता है | यदि कहीं जल जाएं तो तुरंत एलोवेरा जेल लगाएं इससे छाले नहीं पढ़ते और जलन भी समाप्त हो जाती है | यदि दाढ़ी बनाते वक्त कट जाए तो एलोवेरा का जैल लगाएं |

कोहनी एवं घुटनों के काले घेरे दूर करे एलोवेरा :


एलोवेरा के जैल में नारियल का तेल मिलाकर लगाने से कोहनी , घुटने और एडियों पर बने काले दाग धब्बे ठीक हो जाते हैं |

आपके लिए सुझाया गया -पालक और हमारा स्वास्थ


सावधानी :


एलोवेरा के आयुर्वेदिक एवं औषधीय गुण इसे कई बीमारियों के लिए बेहतरीन घरेलू उपचार का विकल्प देते हैं | किंतु किसी भी चीज का अत्यधिक सेवन लाभ की बजाय नुकसान देता है | एलोवेरा के साथ भी ऐसा ही इसके अत्यधिक सेवन से निम्न परेशानियां हो सकती हैं -

1 . जिन व्यक्तियों को दिल से संबंधित कोई परेशानी हो उन्हें एलोवेरा के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए एलोवेरा जूस की अत्यधिक मात्रा शरीर में एंड्रेनालाइन की अत्यधिक मात्रा उत्पन्न कर सकता है | जो हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए अच्छा नहीं है |यह शरीर में पोटेशियम की मात्रा भी कम कर सकता है | जिससे दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है शरीर में कमजोरी भी आ सकती है बच्चो और बुजुर्गो को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए |

2 . एलोवेरा रक्तचाप को कम करता है (low blood pressure) अतः जिनका रक्तचाप कम (low blood pressure) रहता है | उनके लिए एलोवेरा का अधिक मात्रा में सेवन प्राणघातक हो सकता है |

3 . एलोवेरा का अत्यधिक सेवन मांसपेशियों को कमजोर कर सकता है यदि आपको किसी चीज से एलर्जी हो तो एलोवेरा का प्रयोग डॉक्टर के परामर्श से ही करें |

4 . गर्भवती महिलाएं इसके अत्यधिक उपयोग से बचें क्योंकि इससे गर्भपात होने का खतरा रहता है |


5 . जहां एक तरफ एलोवेरा त्वचा के लिए फायदेमंद है वहीं दूसरी ओर इसका आवश्यकता से अधिक उपयोग से त्वचा में जलन , खुजली और चकत्ते भी हो सकते हैं |

शनिवार, 14 सितंबर 2019

Dysentery symptoms and treatment




पेचिश,अतिसार (diarrhoea) रोग के लक्षण :


Dysentery symptoms and treatment

diarrhoea







पेचिश पेट से सम्बंधित रोग है | यह रोग उड़द, चना , मावा आदि से बने खाद्य पदार्थों के सेवन से और हल्के पदार्थों का भी अधिक मात्रा में सेवन करने से होते हैं | जो भोज्य पदार्थ अधिक तेल,घी से युक्त हो या अधिक मसाले के मिश्रण से बने हो, उनसे भी पेचिश की बीमारी को हो जाती है |



इस रोग में बार-बार पेट में मरोड़ सी होती है ,और शौच जाने की शंका बनी रहती है ,दस्त अधिक नहीं होते हैं , दस्त की जगह इसमें चिकनाई लिया हुआ पदार्थ जिसे आंव कहते हैं, मिला रहता है | कभी-कभी खून भी आ जाता है, परंतु कभी-कभी खून और आंव दोनों मिले हुए आते हैं | पेट और गुदा में एंठन सी होती है | जिससे रोगी को पीड़ा अधिक होती है | और बेचैनी सी होने लगती है कभी-कभी सामान्य रूप से बुखार भी आ जाता है | आज के समय इस रोग में अधिक वृद्धि होती जा रही है और इस रोग के भयंकर परिणाम भी आए दिन सामने आ रहे हैं जैसे - आंतों की सूजन, आंतों का फैल जाना या सिकुड़ जाना, आंतों में घाव हो जाना, संग्रहणी आदि अनेक रोग हैं जिनका रूप भयानक होता है |


पाचन क्रिया का ठीक प्रकार से काम ना करने के कारण खून भी नहीं बन पाता , जिससे रोगी प्रतिदिन कमजोरी का अनुभव करते है |

पेचिश के रोगी का भोजन करने और शौच जाने में बड़ा संबंध देखने को मिलता है | अर्थात रोगी के भोजन करने के उपरान्त , शौच जाने की इच्छा प्रबल हो जाती है | ऐसे रोगी प्रातः काल नित्यकर्म के बाद चाय नाश्ता करने के उपरान्त पुनः शौच के लिए जाना पड़ता है |

ऐसे रोगियों के मल के अंदर बिना पचे प्रोटीन के फाइबर्स मिलते हैं | यह क्रम लगातार वर्षो तक चलता है | तथा रोगी अपने को स्वस्थ मान कर इसकी चिंता नहीं करता इसका कारण यह भी है, कि उसे अप्रत्यक्ष रूप से अपने स्वास्थ्य में कोई अंतर नहीं दिखाई देता | परंतु जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, रोगी अपने अंदर कमजोरी के अनेक लक्षण में अनुभव करता है, इससे पेट में गैस बननी प्रारंभ हो जाती है, जिसके कारण कभी-कभी बेचैनी महसूस होती है, इसके अतिरिक्त खून की कमी (anaemia) हो जाती है | मुंह में छालों की शिकायत भी हो जाती है,और मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है, कई बार रोगी को लगता है कि उसका दिल बैठ रहा है , कभी-कभी युवावस्था में रोगी के चेहरे पर मुंहासे हो जाते हैं |


इलाज़ :


1 . 1 तोला दूधी बूटी लें उसे साफ़ पानी में अच्छी तरह पीस लें फिर उसे अच्छी तरह छान कर पियें यह दस्त में बहुत ही लाभकारी है |

2 . इंद्रजौ का चूर्ण पांच-पांच ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार साफ़ एवं सादा पानी से लें |

3 . ईसबगोल की भुसी दिन में तीन बार पांच-पांच ग्राम की मात्रा में साफ़ एवं सादा पानी से लें |

4 . प्रतिदिन लगातार दो पके हुए केले के गूदे में गुड़ , नामक अथवा दही मिलाकर खाने से कुछ ही दिनों में पेचिश रोग जड़ से चला जाता है |

5 . पांच ग्राम पिप्पली ,पांच ग्राम काली मिर्च , दो ग्राम काला नमक ,पांच ग्राम अजवायन |इन सब को अच्छी तरह पीस लें |प्रातः पांच ग्राम चूर्ण का सेवन करने के पश्चात सहजन की छाल के काढ़े को पी लें |

6 . 20 ग्राम आंवला थोड़े से पानी में भिगो दें जब यह नरम हो जाए तो थोड़ा सा नमक मिलाकर पीस लें और 1-1 माशे की गोलियां बनाकर सुबह-शाम एक-एक गोली खाएं इससे आमाशय और आंतों के दुर्बलता से आने वाले दस्त बंद हो जाएंगे |

7 . आम की सूखी हुई गुठली की मिगी और भुनी हुई सौंफ बराबर मात्रा में लें और अच्छी तरह पीस लें | इस मिश्रण को प्रतिदिन सुबह -शाम पांच-पांच ग्राम की मात्रा में साफ़ पानी के साथ ले |यह सभी तरह के दस्तों में लाभदायक औषधि है |