रविवार, 11 अगस्त 2019

Rainy season and your health

बारिश का मौसम और आपकी सेहत :




Rainy season and your health
Rainy Season and your health





बारिश का मौसम हर किसी को लुभाता है इस मौसम में भीगना शायद ही किसी को अच्छा न लगता हो | किंतु दिल में स्वास्थ्य को लेकर एक चिंता भी बनी रहती है कि कहीं बारिश में भीगने से हमारी सेहत अथवा हमारी त्वचा पर कोई बुरा असर ना हो |
यदि हमारा स्वास्थ्य ठीक है तभी हम किसी भी मौसम का भरपूर आनंद ले सकते हैं | अन्य मौसमों की तरह मानसून में भी शरीर अनेक विकारों का सामना कर सकता है | यदि थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो हम इस बरसाती मौसम का भरपूर आनंद ले सकते हैं |

बरसात के मौसम में इन बातों का रखें ख्याल :

बरसात में अधिक समय तक भीगने से बचे | यदि कभी ऐसा मौका आ जाए तो सिर को कम से कम भीगने दें | भीग जाने पर तुरंत सबसे पहले सिर को सुखा लें वरना वहां भारीपन एवं दर्द आदि हो सकता है |
मेहनत वाले काम जिनमे पसीना अधिक आता हो जैसे – साइकिल चलाना .मजदूरी करना .कपड़े धोना ऐसे काम करने से पसीना अधिक आता है और शरीर भी गर्म हो जाता है | अतः ऐसे काम करने के बाद बारिश में भीगने से बचें | यदि आप अधिक परिश्रम करने के बाद बारिश में भीगते है तो आपको बुखार ,बदन दर्द ,दाने-खुजली या पित्त (त्वचा रोग ) आदि रोग हो सकते है |
स्विमिंग पूल , नदी , नहर , तालाब आदि में नहाने से पहले अपने कानो में रुई अथवा इयर प्लग लगा ले | अन्यथा कान में पानी जाने से कान में दर्द , सुजन , कान बंद हो सकता है इससे कान बहने जैसी समस्या हो सकती है |
अधिकतर लोग वर्षा होने पर अपने आप को रोक नहीं पाते और बारिश होने पर नहाने लगते है | और यह स्वभाविक है | परन्तु पहली बारिश में कभी ना नहायें क्युकी वायुमंडल में फैले दूषित कण भी उस बारिश में घुल जाते है | अतः पहली बारिश में नहाने से त्वचा रोग (पित्त ,खुजली ,फोड़े-फुंसी आदि ) होने की संभावना अधिक रहती है |
बारिश में भीगने के बाद घर पर साफ़ पानी से अवश्य नहाएं | ऐसा ना करने पर त्वचा रोग हो सकते है |
अधिक देरी तक भीगने या यूं ही गीले कपड़े पहने रहना , कच्ची गीली जगह पर अधिक देर बैठना या लेटना , नमी वाली जगह पर या मकान में रहना जहा सूर्य का प्रकाश और हवा ना आती हो | एसी जगह रहने से जुकाम ,खांसी , जोड़ो में दर्द , खुजली आदि जैसे रोग होने की संभावना बढ़ जाती है |
भीगे हुए जूते-मोज़े अधिक देरी तक ना पहने रहें | और ना ही पैरों को अन्य किसी कारण से गिला रखें | ऐसा होने पर ( घुटनों का दर्द ,पेट के विकार ,दर्द ,सूजन, भूख ना लगना, मरोड़ आदि ) एवं महिलाओं में माहवारी के समय उतार-चढ़ाव की संभावनाएं बढ़ जाती हैं |
प्रकृति के अनुसार इन दिनों सूरज घने बादलों के आगोश में समाया रहता है | ऐसे में तली- भुनी वस्तुएं खाने की भी इच्छा बढ़ जाती है | जिससे पेट की बीमारियां जैसे मंदाग्नि ,पेट दर्द, दस्त, मरोड़, आंव आदि से प्रभावित होने के मौके बढ़ जाते हैं |
बरसात के मौसम में जगह-जगह पानी भरने से गंदगी का बढ़ जाती है | जिससे नालियां एवं सड़कों की गंदगी घरों में पहुंच जाती हैं | जिससे पीने का पानी दूषित व पैर लगातार भीगे रहने पर अनेकों विकार हो सकते हैं |
बरसात में कपड़ों पर बारिश के धब्बे भी पड़ जाते हैं | इनसे घबराइए नहीं इन धब्बों को निकालना बड़ा ही आसान है आप ऐसे कपड़ों को गर्म पानी की भाप दीजिए धब्बे तुरंत गायब हो जाएंगे | यदि इस तरह धब्बे ना जाए तो है तो एसिटिक एसिड की सहायता से उन्हें छुड़ा सकते हैं |
यह मौसम फंगल (फफूंदी ) पैदा करने वाला होता है | जिसका प्रभाव शरीर के जोड़ों (जहां पसीना कम सुख पाता है ) मैं अधिक होता है | जैसे बगल ,राग जांघों के बीच कोहनी आदि यहां दाद – खुजली पैदा हो सकती है |

बरसात में होने वाले रोगों से बचने के उपाय :

बारिश में भीगने से बचने के लिए छाते, रेनकोट, ट्राउजर, व कैप आदि का प्रयोग सबसे अच्छा तरीका है | विशेषकर वाहन चलाते समय भीगते हुए अपने काम को अंजाम देने व आकस्मिक घटना का सामना करने से मैं भी कम परेशानी होगी |
अचानक आई वर्षा का सामना करते समय एक छोटे पॉलीबैग द्वारा अपने सिर को जरूर ढक ले |
वर्षा में भीगी हालत में घर पहुंचने पर गीले कपड़े तुरंत उतार कर ताजे पानी से जरूर नहा लें |नहाने के बाद साफ एवं सूखे हुए कपड़े पहने |
बरसात के मौसम में सबसे अधिक सावधानी पानी के प्रयोग मे बरतने की आवश्यकता है | क्योंकि बरसात में फैलने वाली कई बीमारियां पानी के द्वारा ही फैलती हैं | अतः पीने और खाना बनाने के लिए हमेशा उबला हुआ पानी प्रयोग करें इसके उपयोग से बरसाती बीमारियों से बचना आसान होगा |
बरसात में कच्चा प्याज नियमित रूप से खाएं अगर प्याज में सिरका मिला लें तो अति उत्तम होगा इसके नियमित प्रयोग से बरसाती बीमारियां नजदीक नहीं आती |
यदि आपको जुखाम हो गया है तो पानी में नींबू का रस डालकर पीएं | ऐसे समय में हल्का भोजन लें | साथ ही यह भी ध्यान रखें कि भोजन पौष्टिक हो |
यदि आपके बच्चे को जुखाम हो गया है तो रात को सोते समय हल्दी को पानी में रगड़ कर प्राप्त अवलेह को उसके माथे और नाक पर लगाएं | साथ ही उसे गरम कपड़ा उड़ा दें | इससे तुरंत लाभ मिलेगा यदि जुकाम के साथ आपके बच्चे को खांसी भी हो गई है तो थोड़े से शहद में ब्रांडी की कुछ बूंदें डालकर उसे पिला दें |
बुखार आने पर देसी घी माथे पर मले एवं बाद में गीले (सूती मोटे हल्के रंग ) वाले कपड़े की पट्टी माथे पर रखें जिससे तापमान में गिरावट आएगी | बुखार अगर तेज़ हो तो पट्टी को ठंडे पानी में भिगाकर जल्दी-जल्दी बदले |
जुकाम में नाक बंद होने पर चम्मच में गुनगुना (हल्का गर्म) सरसों का तेल छोटी उंगली द्वारा नाक के दोनों छिद्रों में डालकर ऊपर खींचे बंद नाक खुल जाएगी | सांस लेने में भी अधिक परेशानी नहीं होगी |
कान दर्द में सूती कपड़े को गर्म कर बाहर से सिकाई करें |
दस्त, मरोड़,आंव या खून मल के साथ आए तो पीने योग्य थोड़ा- थोड़ा पानी जल्दी-जल्दी पानी पीने को दें | इसके अलावा ओआरएस, ग्लूकोज, मट्ठा, दही, जौ का पानी ,सत्तू आदि दें |
खुजलाहट होने पर उस अंग की खाल पर गोले का तेल का या देसी घी की मालिश करें | नमकीन चीजों का सेवन कम करें |
गीले , नमी, सीलन वाले कमरे या मकान जिसके पास कोई पोखर नदी नाला आदि हो और जहां धूप और हवा ना आती हो ऐसी जगह पर कतई ना रहें | यदि रहते हो तो जल्द से जल्द बदल दें |

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

Rainy season and your food



बारिश का मौसम और स्वस्थ भोजन :

 बारिश के मौसम का हम बेसब्री से इंतजार करते हैं | लेकिन इस खुशी के साथ साथ हमें यह चिंता भी सताती है | कि कहीं बारिश के मौसम में हम जो खान-पान करते हैं उससे हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव ना पड़े इसलिए इस मौसम में खास ख्याल रखने की जरूरत है आइए जानें कैसे |



Rainy season and your food
 Rainy season and your food


वर्षा ऋतु में दूषित वात, पित्त, कफ के कारण हमारे शरीर की जठराग्नि मंद हो जाती है | भोजन का पाचन ठीक तरह से नहीं हो पाता | पेट से संबंधित कई रोग हो जाते हैं | इस मौसम में व्यक्ति चर्म रोगों के शिकार अधिक हो जाते है |इसलिए व्यक्ति को इस मौसम में संयमित आहार-विहार करना चाहिए |                                                         
स्वस्थ और निरोग रहने के लिए आवश्यक है | कि प्रत्येक मनुष्य अपनी प्रकृति शारीरिक अवस्था स्थान देश और मौसम के अनुसार भोजन करें | यदि ऐसा नहीं किया जाता तो शरीर को अनेक रोग अपनी चपेट में ले सकते हैं | यही कारण है कि आयुर्वेद में ऋतुओं के आधार पर आहार-विहार का निर्धारण किया गया है | सर्दी ,गर्मी और वर्षा ऋतु में से वर्षा ऋतु में खानपान पर अधिक ध्यान देना चाहिए | क्योंकि इस मौसम में वातावरण में नमी अधिक होने से शरीर की पाचन क्रिया मंद पड़ जाती है | जिससे अनेक रोग पैदा हो जाते हैं इस ऋतु में चर्म रोग होने की संभावना अधिक रहती है | क्योंकि पानी दूषित हो जाता है | वर्षा ऋतु में शरीर भारी-भारी रहता है सुस्ती और तंद्रा छाई रहती है | काम करने को कम और सोए रहने को अधिक मन करता है | 

ऐसे में शारीरिक श्रम भी कम हो पाता  है | इसका कारण यह है कि पानी गिरने से चलन-परिचालन प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है स्फूर्ति ,बल और अग्नि क्षीण हो जाती है तथा वात का प्रकोप अधिक होने लगता है | पित्त की मात्रा बिगड़ जाती है |

इस मौसम में शरीर में दर्द , थकावट, दस्त, उल्टी एवं चर्म रोग आदि न पचने या गलत और असमय लिए गए आहार के कारण उत्पन्न हो जाते हैं | शरीर की रक्षात्मक क्षमता एवं रोगों से लड़ने की शक्ति भी क्षीण हो जाती है |


वर्षा ऋतु में होने वाले रोग :

अग्निमांद्य ,अजीर्ण ,कृमि ,अल्मपित्त , त्वचा रोग, एलर्जी , कास श्वास , संधि विकार, संधि शूल आदि बरसात में होने वाले रोग हैं |

वर्षा ऋतु में कैसा भोजन करे :

 वर्षा ऋतु में जठराग्नि क्षीण हो जाती है | इसलिए हल्के एवं जल्दी पचने भोजन का सेवन करना चाहिए |
वर्षा ऋतु में भिंडी, लौकी, तोरई, परवल, कद्दू , करेला आदि सब्जियों का सेवन करना चाहिए |
फलों में आम, जामुन,बेर , अंगूर आदि का सेवन उत्तम रहता है अपने आहार में व्यक्ति को हरा, धनिया, लहसुन, अदरक, जीरा ,हींग ,काली मिर्च आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए |
भोजन में गेहूं, ज्वार, पुराना जौ, साठी चावल,लाल चावल आदि का उपयोग करना चाहिए |
दूध ,धी का सेवन भी इस मौसम में वात नाशक एवं शारीरिक शक्ति के लिए अच्छा रहता है पानी में शहद मिलाकर पीना चाहिए |पुराने चावल,गेहूं, खिचड़ी ,मूंग की दाल, मसाले से युक्त साग-सब्जी जैसे- परवल, बैगन, बथुए का साग, आदि का सेवन ठीक रहता है |
वर्षा ऋतु में पसीना बहुत आता है और बहुत देर से सूखता है | शरीर का सारा भाग पसीने के कारण चिपचिपा हो जाता है | जिससे चर्म रोग होने की संभावना बढ़ जाती है ऐसे में नीम, करेला आदि का प्रयोग करना चाहिए साथ ही कोष्ट को शुद्ध रखने के लिए त्रिफला लें | सोंठ , लहसुन, प्याज, पुदीने का भी सेवन करें |
पानी हमेशा उबालकर ठंडा करके ही पिएं |
यदि आपको दमा अथवा श्वास रोग हो तो कफ़ नाशक पदार्थो का सेवन करे जैसे - काली मिर्च , कला नमक , दाल चीनी , सोंठ , जीरा , आदि |

वर्षा ऋतु और सावधानी :

1 . दिन में कम से कम दो बार स्नान करें |एवं हल्के रंग वाले सूती कपड़े पहनें |
2 . वर्षा ऋतु में शाम का भोजन सूर्यास्त होने से पहले ही कर लेना चाहिए क्योंकि सूर्यास्त होने के बाद जठराग्नि और मंद हो जाती है |
3 . भोजन हल्का और सुपाच्य ही करें ,और कम खाएं |
4 .स्वच्छ व नमी रहित स्थान पर सोना चाहिए जमीन पर ना सोएं |
5 . त्वचा की सफाई नियमित रूप से करनी चाहिए रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें |
6 . शरीर पर तेल की मालिश करनी चाहिए |
7 . वर्षा ऋतु में कभी-कभी तेज धूप होती है |अतः धूप से बचने के लिए छाते का प्रयोग करें कई बार वर्षा के बाद उमस हो जाती है |ऐसे में हल्के कपड़े पहने वर्षा के पानी से भीगने के बाद पंखे की हवा ना खाएं शरीर का तापमान सामान्य होने दे फिर पंखा चलाएं |

क्या ना करें :

1 . हर जगह का पानी ना पिएं वर्षा काल में दूषित जल पीने से अनेक रोग हो जाते हैं
2 . बरसात के मौसम में नदी तालाब जलाशय आदि में स्नान नहीं करना चाहिए |
3 . वर्षा ऋतु में स्त्री के साथ अधिक संसर्ग नहीं करना चाहिए |
4 . बरसात के मौसम में जीव जंतु व जहरीले कीड़े भूमि पर विचरण करने लगते हैं अतः इस मौसम में नंगे पैर नहीं घूमना चाहिए |
5 . इस मौसम में दिन में सोना नहीं चाहिए अधिक परिश्रम करने से भी बचें |
6 . वर्षा ऋतु में नए अनाज का इस्तेमाल ना करें क्योंकि इससे पाचन पर बुरा प्रभाव पड़ता है |
7 . वर्षा ऋतु में अधिक ठंडे पदार्थ ना लें |
8 . पानी हमेशा उबालकर ही पिएं इस मौसम में पानी के अशुध्द होने के कारण ही ज्यादा रोग होते हैं |अतः हमेशा पानी को शुद्ध करके ही पिएं |
9 . मांस, मछली, दही, कच्चा दूध, लस्सी आदि का प्रयोग ना करें | क्योंकि यह सब खाने का मतलब है अधिक परिश्रम और अधिक परिश्रम से पसीना आता है |और बारिश में अधिक पसीना आने का मतलब है ,रोगों को दावत देना | घी मक्खन तथा चिकने भोजन से भी बचें |