रविवार, 31 मार्च 2019

best Homey tips to stop anger

                     

क्या आपको गुस्सा अधिक आता है ?

अधिक क्रोध और घ्रणा मनुष्य के असली दुश्मन  है | क्रोध बहुत ही हानिकारक एवं घातक है  यदि इसका उपचार सही समय पर ना किया जाए तो इसके परिणाम भयंकर हो सकते हैं | इस क्रोध के कारण ना जाने कितने ही परिवार बर्बाद हो जाते हैं | अतः हमें क्रोध पर काबू पाना चाहिए |


 Angry women



जब व्यक्ति अधिक क्रोधित होता है तो वह काँपता रहता है | तो उसके खून के स्वेत  कण  तेजी से नाश होते हैं |  जब आप किसी बात पर अथवा किसी व्यक्ति से ज्यादा जायज और नाजायज नाराज होकर आधा घंटा अगर क्रोधी रहते हैं तो लगभग 35 से 40 मिलीग्राम खून ज़हर में बदल जाता है | और जब खून दूषित हो जाता है | तो परिणाम स्वरूप आप बीमार होने लगते हैं और कई बीमारियों की शुरुआत हो जाती है | 

उसमें मुख्य हैं :- पित्ताशय की पथरी व गुर्दे की पथरी इसका इलाज ऑपरेशन ही है क्रोध से प्राणशक्ति बहुत खर्च होती है और इन से शरीर में क्षोभ होने पर प्राणादि    वायु अपने समभाव  को छोड़कर उल्टे सीधे मार्ग में गति करने लगते हैं |  इससे शरीर का रस सूख जाता है | और व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर, कमजोर याददाश्त और हृदय के रोगी हो जाते हैं | 

1. क्रोध रोकने के लिए सबसे अच्छा उपाय है |  भोजन हमेशा शांत होकर करें एवं एक-एक कौर को 32 बार चबाएं |  पूरे भोजन को धीरे धीरे 20 से 25 मिनट तक खाएं |  जब क्रोध आए तो हाथ की हथेली दवा ले तो नुकसान नहीं होगा |  95% क्रोध नियंत्रित हो जाएगा 5% क्रोध ईश्वर ने हमें अनुशासन, दूसरों की रक्षा और अपनी आत्मरक्षा के लिए दिया है |  जो आप को कोई नुकसान नहीं पहुचता | 

2. अगर आपको भूख नहीं लगती , नींद अधिक आती है , शरीर टूटता है , और शरीर भारी अर्थात मोटा है | तो 10 ग्राम शहद  , 10 बूंद अदरक का रस , आधा नींबू का रस , 5 से 7 तुलसी के पत्ते , और संतकृपा चूर्ण इन सबको एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर प्रतिदिन प्रातः पियें |

3. फास्ट फूड और जंक फूड के सेवन से क्रोध अधिक आता है अतः इनका सेवन कम से कम करे |

4. क्रोधी स्वाभाव वाले को सप्ताह में एक दिन उपवास करना चाहियें |

5. जब क्रोध आप पर हावी हो तब शांत रहे अधिक ना बोले |

6. अधिक क्रोध आता है तब एक महीने नमक का सेवन ना करे |


मंगलवार, 26 मार्च 2019

How to overcome obesity with yoga




योग के द्वारा मोटापे को करे कम : 


चक्रासन : 

इस आसन में शरीर की स्थिति चक्र जैसी बनती है अतः इसे चक्रासन कहते हैं ध्यान मणिपुर चक्र में श्वास दीर्घ , गहरे एवं स्वाभाविक |

 yoga




 चक्रासन 



योग करने की विधि :

भूमि पर बिछी हुए आसन पर पीठ के बल लेट जाएं |  घुटनों को मोड़ ले एवं दोनों हाथों और पैरों में एक से डेढ़ फीट का अंतर रखें | घुटनों से पैर मोड़कर पूरे धड़ को दूसरी तरफ हाथ का सहारा लेते हुए , हाथों और पैरों को सीधा करते हुए सिर और शरीर को पूरी गोलाई लेते हुए ऊपर उठाएं | पैर के तलवे जमीन से लगे रहे | हाथ को धीरे-धीरे पैर की ओर ले जाकर सम्पूर्ण शरीर का आकार चक्र जैसा बनाएंं | इस समय घुटने समकोण की स्थिति में रहेंगे | श्वास की गति स्वाभाविक चलने दे | या रोक कर भी रख सकते है | चित्तवृति मणिपुर चक्र ( नाभि केंद्र ) 
में स्थिर करे | इस क्रिया में एक से पांच मिनट तक रुकने का अभ्यास करे | 
थोड़े दिनों के अभ्यास से आप हाथ और पैरो को आपस में मिला भी सकते है |

चक्रासन के लाभ :

चक्रासन करने से मेरुदंड तथा शरीर की सभी नाड़ियों  एवं ग्रंथियों की शुद्धिकरण कर के योगिक चक्र जागृत हो जाते हैं |  मस्तिष्क ,गर्दन , पीठ, पेट, कमर, हाथ, पैर, घुटने आदि सब अंग मजबूत बनते हैं |  जोड़ो में दर्द नहीं होता |  पाचन शक्ति बढ़ती है | पेट की अनावश्यक चर्बी दूर होती है | शरीर तेजस्वी एवं फुर्तीला बनता है | शारीरिक विकार नष्ट होते हैं |  नाभि को स्थिर करने के लिए यह बहुत उचित आसन है |  इस आसन के करने से स्वप्न दोष का रोग भी दूर हो जाता है | महिलाओं में प्रदर रोग की बीमारी नहीं होती | चक्रासन के नियमित अभ्यास से शरीर सीधा तना हुआ रहता है एवं वृद्ध अवस्था में भी कमर झुकती नहीं है | 

चेतावनी :

उच्च रक्तचाप, हृदयरोग, पेट के आंतरिक घाव ,कमर में ज्यादा दर्द अथवा स्लिप डिस्क के मरीज आसन ना करें |

सोमवार, 25 मार्च 2019

how to control high blood pressure from lemon



कैसे करे कंट्रोल नींबू से उच्च रक्त चाप ? ( High blood pressure ) : 



हृदय की कमजोरी दूर करने के लिए नींबू में विशेष गुण होते हैं | इसके निरंतर प्रयोग से रक्त वाहिनियों में लचक और कोमलता आ जाती है | और इनकी कठोरता दूर हो जाती है | इसलिए उच्च रक्तचाप (high blood pressure )  जैसे रोग को दूर करने में नीबू बहुत उपयोगी है | इसके उपयोग से बुढ़ापे तक हृदय शक्तिशाली बना रहता है एवं  दिल का दौरा (heart attack) का भय नहीं रहता | कैसा भी  उच्च रक्तचाप (high blood pressure)  हो  पानी में नींबू निचोड़ कर दिन में तीन-चार  बार पीने से लाभ होता है | प्रातः  एक नींबू का रस गर्म पानी में मिलाकर पीना बहुत ही  स्वास्थ्यवर्धक  है |




 how to control high blood pressure from lemon

नींबू का रस मुख्य रूप से  पोटाशियम और साईट्रेक तथा साईटिक एसिड के कारण क्षारीय होता है | नींबू का रस शरीर में पहुंचते ही पोटाशियम साइट्रेट में खंडित हो जाता है | और साइट्रिक एसिड का रूप ले लेता है पोटाशियम साइट्रेट पेट में आर्टिरियल कैपिलरी के चारों ओर बंट जाता है , तथा भस्म होकर कार्बन डाइऑक्साइड में बदलकर फेफड़ों में होता हुआ प्रवास के साथ बाहर निकल जाता है और पोटैशियम ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में बदल जाता है | जो तीव्र क्षारीय होता है  | 

नींबू में 8.5% साइट्रिक एसिड पाया जाता है | नींबू पोषण की दृष्टि में पोटैशियम में 7 मुख्य स्रोतों में से एक है पोटाशियम मस्तिष्क को ऑक्सीजन भेजकर मनुष्य को स्पष्ट विचार शक्ति प्रदान करता है | नींबू शरीर में जमा अतिरिक्त गंदगी अथवा विजातीय द्रव्य को बाहर निकाल देता है | नींबू में कैल्शियम भी पाया जाता है | जो  दांतो एवं हड्डियों के निर्माण में मुख्य स्त्रोत माना जाता है | नींबू में मैग्नीशियम  भी पाया जाता है जो खून में अलव्यूमेन  के निर्माण में सहायता करता है | नींबू में कई प्रकार के एंजाइम भी पाए जाते हैं | नींबू शरीर में सोडियम का संयोग पाकर जलीय अंश को नियंत्रित करता है |

रविवार, 24 मार्च 2019

Honey is boon for eyes



शहद आंखों के लिए है वरदान :

शहद आंखों के रोगों के लिए बहुत ही लाभकारी है | प्रतिदिन शहद का उपयोग करने से नेत्र ज्योति बढ़ती है आमतौर पर शहद का प्रयोग आंखो में डालने के लिए किया जाता है इससे आंखों में पानी आ जाता है जो की  आंखों के लिए बहुत लाभकारी होता है |

 कमल का शहद दृष्टि कम होने पर एक प्रभावी इलाज है | 10 ग्राम शहद में तीन बूंद नींबू का रस 10 ग्राम गुलाब जल मिलाकर सलाई या ड्रोपर से आंखो में डाले |

 मोतियाबिंद की प्रारंभिक अवस्था में विशेष रूप से एक तोला शहद में 5 से 10 बूंद प्याज का रस मिलाकर सलाई से 2 बार प्रतिदिन लगाएं | साधारण रोगों में खाली शहर का प्रयोग भी किया जा सकता है |

 Eye and Honey 




काला मोतियाबिंद ( Black Cataract) :

काला मोतियाबिंद क्या है ?

         आंखों में एक तरल पदार्थ के बढ़ने पर आंखों की मांसपेशियां पर दबाव बढ़ने से यह रोग होता है | किसी रूकावट के कारण यह तरल कोर्निया की तहों में इकट्ठा होकर जम जाता है | जिससे रेटीना पर जवाब पड़ता है और अंत में पूर्ण अंधकार छा जाता है | और ऑपरेशन ही केवल इसका इलाज रह जाता है | ऑपरेशन में एक  सुराख बनाकर पुतली से तरल पदार्थ बाहर निकाल दिया जाता है |

प्रारंभ में अगर शहद का आंतरिक और बाहरी प्रयोग किया जाए तो इस रोग से बचा जा सकता है | क्योंकी शहद में पानी को सोखने की क्षमता होती है | लेकिन अधिक देरी होने पर इससे लाभ नहीं होता | 

शुद्ध हींग को पीसकर इसमें शहद मिलाकर सुबह-शाम शीशे की सलाई से आँखों में लगाने से लाभ होता है | 


गुरुवार, 21 मार्च 2019

Do you know about these qualities of coconut



क्या आप जानते है नारियल के इन गुणों के बारे में ?

आजकल सभी ग्लैमरस और खूबसूरत दिखना चाहते है ,खासकर लडकियांं अपनी खूबसूरती को निखारने के लिए अपनी आँखों ,होठों ,और चेहरे का पूरा ध्यान रखती है | कुछ ऐसे ही घरेलु नुस्खे है जो आपकी सुन्दरता में चार चाँद लगा देंगे |


 Benefits of Coconut




सुन्दरता को निखारने में बालों का बहुत ही महत्त्व है | काले , लम्बे ,घने बाल आपकी सुन्दरता में चार चाँद लगा देते है | अगर आप भी अपने बालों को खूबसूरत बनाना चाहती है | तो हफ्ते में दो बार नारियल के तेल से अपने बालों की अच्छी तरह मालिश करे | नारियल का तेल बालोंं के लिए बहुत ही उत्तम है| 
यह बालों को पोषण प्रदान करता है | और यह तेल आपके बालों की जड़ो में जाकर उन्हें लंबा , घना और मजबूत बनाता है |

चेहरे को सुन्दर और ग्लोइंग स्किन पाने के लिए प्रतिदिन सुबह खाली पेट नारियल पानी पिये | नारियल पानी पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है | नारियल पानी में एंटीआँँक्सीडेंट गुण भरपूर मात्रा में पाये जाते है | जो हमारे ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते है | इसे पीने से स्किन में ग्लो आता है |

अगर आप ग्लोइंग स्किन पाना चाहते है तो दिन में कम से कम 8 गिलास पानी अवश्य पिये | 

अधिक पानी पिने से हमारे शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ बहार निकल जाते है और त्वचा में चमक आती है | 

रविवार, 17 मार्च 2019

Why do eating grapes decrease the chance of heart attack


क्यों अंगूर खाने से दिल के दौरे की संभावना कम हो जाती है ?

कितने ही वर्षो से विभन्न देशो में इरान,रोम,फ़्रांस,स्पेन,भारत आदि जगह उत्पादित फल अंगूर सोमरस से ब्रांडी तक की सफल यात्रा कर रहा है |

सुरा ( शराब ) निर्माण में विशेष रूप से उपयोग में लाये जाने वाला अंगूर विख्यात स्वास्थ्य टॉनिक "द्राक्षास्रव" का प्रमुख अवयव है | अंगूर मुख्यतः दो प्रकार के होते है |


 grapes 



1 . हल्के हरे पीले रंग वाला अंगूर 
2 . गहरे बैंगनी काले रंग वाला अंगूर 

स्वाद की दृष्टि से हल्के हरे पीले रंग वाले अंगूर अधिक लोकप्रिय है |
परन्तु हार्ट अटैैक से बचने के लिए बैंगनी काले रंग वाला अंगूर "एस्प्रिन" की गोली की तरह कारगार है |

जिस तरह एस्प्रिन की गोली शरीर में खून के थक्के नहीं बनने देती | उसी तरह यह अंगूर भी काम करता है |

एक अध्ययन के अनुसार बैंगनी अंगूर के रस में फ्लेवोनाइडस नामक तत्व पाया जाता है, जो रक्त कणिकाओं के चिपकने की शक्ति घटा देता है |  खून जमाने की प्रक्रिया की शुरुआत यहीं रक्त कणिकाएं करती हैं बैंगनी अंगूर का रस रक्त कणिकाओं के चिपकने की शक्ति को घटाकर हार्ट अटैक की संभावना को रोक देता है |

अंगूर एक ऐसी औषधि है जो कि स्वादिष्ट होने के साथ-साथ थैलेसीमिया जैसे रोग में बहुत उपयोगी है | दोष धातु मल में किसी के भी क्षीण हो जाने पर व्यक्ति अपनी खोई  हुई शक्ति को पाने के लिए शक्ति वर्धक खाद्य पदार्थ को लेने की इच्छा करता है अतः जब किसी कारणवश व्यक्ति का रक्त क्षीण हो जाता है | तो उसे अंगूर अनार आदि शक्ति वर्धक द्रव्यों का सेवन करना चाहिए रक्त निर्माण करने वाले सभी तत्व अंगूरों में पाए जाते हैं |

थैलेसीमिया रोग में अंगूर से बनने वाली किसमिस तथा मुनक्का दोनों का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जिन-जिन  तत्वों की आवश्यकता होती है वह सारे अंगूर में विद्यमान हैं | अतः इलाज के समय या बाद में रोगी को अंगूर खाने के सलाह दी जाती हैं | जिससे रोगी अपने अंदर कमजोरी महसूस ना करें अंगूर पाचन शक्ति बढ़ाता है तथा अंगूर के सेवन से मनुष्य अपनी खोई हुई शक्ति पुनः प्राप्त करता सकता है अंगूर के रस को दूध से भी अधिक शक्ति-वर्धक और रक्त-वर्धक बताया गया है | जब व्यक्ति बीमारी से उठकर अपने अंदर कमजोरी महसूस करता है | तथा पाचन शक्ति भी उस समय ठीक नहीं होती , ऐसे समय में अंगूर का सेवन प्रतिदिन नित्य कराया कराया जाए तो यह मंदाग्नि को ठीक करके जठराग्नि को प्रज्वलित करता है | शरीर की सप्त धातुओं की पुष्टि करके रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है | अरुचि को दूर कर भूख बढ़ाता है | थैलेसीमिया रोग के लिए भी अंगूर बहुत उपयोगी है | 

शनिवार, 16 मार्च 2019

How to use garlic to prevent heart attack




क्या सच में लहसुन है कारगार दिल के दौरेे के लिए  :


जी हां दोस्तों कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए लहसुन बड़ा प्रभावशाली है | और इस प्रकार लहसुन  ब्लड-प्रैैशर को रोकने के लिए बहुत कारगर है |  कोलेस्ट्रोल एक ऐसा चर्बीदार पदार्थ है |  जो रक्त नलीकाओं में जमा हो जाता है | इससे पहले एथेरोस्क्लेरोसिस (atherosclerosis) होता है और अंत में ब्लड-प्रैैशर तथा दिल का दौरा पड़ने लगता है |


 garlic


लेकिन यह सत्य है कि लहसुन से कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम किया जा सकता है | लहसुन में गंधक का  एक यौगिक होता है इसमें मुख्यतः डांंईऐलील , डाई सल्फाइड ऐलील, प्रोपाइल और पोली सल्फाइड नामक तत्व होते हैं |  यह यौगिक रक्त को पहला बनाए रखता है और धमनियों में जमे कोलेस्ट्रोल को निकालने का काम करता है |


 heart attack


ब्लड-प्रैैशर बढ़ने का प्रमुख कारण धनिया में जमा होने वाला कोलेस्ट्रॉल नामक पदार्थ है|  जिसमें धमनियांं  सिकुड़कर रोग ग्रस्त हो जाती हैं | इसका परिणाम यह हो जाता है  कि धमनियों में रक्त का बहाव कम हो जाता है जिससे ब्लड-प्रैैशर बढ़ने लगता है | घी और चर्बी वाले पदार्थ कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं | 

लहसुन धमनियों को सिकुड़ने से ही नहीं रोकता , सिकुड़ी हुई रोग ग्रस्त धमनियों में जमे कोलेस्ट्रोल को निकाल कर पुनः ठीक कर देता है | ब्लड-प्रैैशर के रोगियों को भोजन में लहसुन अथवा लहसुन की चटनी का सेवन अवश्य करना चाहिए | सुबह - शाम एक-एक चम्मच पिसा लहसुन शहद के साथ सेवन करने से ब्लड-प्रैैशर नार्मल रहता है और दिल के दौरेे ( heart attack ) की संभावना नहीं होती |

गुरुवार, 14 मार्च 2019

How to remove back and waist pain by yoga





भुजंगासन - सर्पासन :

इस आसन में शरीर की आकृति सर्प के जैसी बनती है इसलिए इस आसन को भृजंगासन - सर्पासन कहते है |




 भुजंगासन -सर्पासन 

 भुजंगासन - सर्पासन करने की विधि :


आसन को करने से पूर्व मन को एकाग्र करे | 
उसके बाद भूमि पर पेट के बल उल्टे लेट जाएं | पैरों के अंगूठे, नाभि, छाती, ललाट और हाथ की हथेलियों भूमि पर एक सीध में रखें | ललाट को जमीन से छूने दीजिए | दोनों पैरों को सिर की तरफ कान के साथ साथ सीधा व लंबा फैला लीजिए | और शरीर को ढीला कर दीजिए जिससे पेट की मांसपेशियां शिथिल हो जाएं | दोनों पैर और पंजे परस्पर मिले होने चाहिए | पैरों के अंगूठे को पीछे की ओर खींचो दोनों हथेलियों को कमर के पास ले जाकर धीरे धीरे स्वास भरते हुए सिर को और कंधों को और कमर तक जमीन से ऊपर उठाएं जिससे मेरुदंड के आखिरी भाग पर दबाव केंद्रित होगा | शरीर की स्थिति कमान की तरह बनेगी |  पूरे शरीर के वजन को हाथ के पंजोंं  पर डाल दें |  इसमें कोहनी थोड़ी सी मुड़ी रहती है | नाभी भूमि से लगी रहनी चाहिए | सिर को जितना हो ऊपर की तरफ ले जाएं और दृष्टि को आकाश की तरफ स्थिर करें |  20 सेकंड तक ऐसी ही  स्थिति में रहना है |  बाद में श्वास छोड़ते हुए धीरे-धीरे सिर को नीचे लाएंं |  छाती भूमि पर लगने दें और ललाट को भी भूमि से लगने दे |  कुछ देर आराम करने के बाद फिर से करें हर रोज 5 से 10 बार यह आसन करें |

ध्यान रखे की शरीर को भूमी से ऊपर उठाते समय स्वास को भीतर लेना है | 20 सेकेण्ड स्वास रोकने के बाद धीरे-धीरे स्वास छोड़े |

 भुजंगासन -सर्पासन 

                                  




भुजंगासन - सर्पासन करने के लाभ :

भुजंगासन करने से जठराग्नि प्रदीप्त होती है|  सब रोगों का नाश होता है| मुख्य रूप से कब तक का पूर्ण आज कर देता है एवं कुंडलिनी जागृत हो जाती है| महिलाओं के लिए भुजंगासन बहुत लाभदायक है| स्त्रियों के प्रजनन संबंधी सभी विकारों को दूर कर देता है | प्रदर रोग ,कष्टदायक मासिक धर्म और अनियमित मासिक धर्म आदि  समस्त कष्ट दूर कर देता है| छाती और पेट का विकास होता है|  गर्भाशय एवं अंडाशय स्वस्थ बनते हैं |

भुजंगासन करने से स्लिप डिस्क , सायटीका ,मेरुदंड से संबंधित छोटे-मोटे दर्द, कमर के समस्त प्रकार के दर्द को दूर कर देता है|  सरवाईकल आदि रोगों को दूर करने में सहायक होता है| इससे पेट की मांसपेशियां मजबूत बनती है| मेरुदंड के तमाम मानकों को तथा गर्दन के आसपास वाले स्नायु को अधिक शुद्ध रक्त मिलता है | मेरुदंड को लचीला स्वस्थ एवं पुष्ट करता है, जिगर और गुर्दे को शक्ति देता है, ह्रदय मजबूत बनता है, मधुमेह और उधर के रोगों से मुक्ति दिलाता है , अमाशय की मांसपेशियों का विकास होता है, थकान के कारण पीठ की  पीड़ा को दूर करके पूरे शरीर में स्फूर्ति प्रदान करता है |

 भुजंगासन समस्त नाडी तंत्र को चेतना देता है | आपको चिरंजीवी शक्तिमान एवं सृदृड़ बनाता है|  मस्तिष्क के ज्ञान तंतु बलवान बनते हैं |

बुधवार, 13 मार्च 2019

How to control blood pressure through yoga




रक्तचाप ( blood pressure ) नियंत्रण करने के लिए करे प्राणायाम  :-

श्वास -प्रश्वास क्रियाओंं का नाम ही प्राणायाम है | प्राणायाम के तीन प्रमुख अंग माने गए हैं | यह तीन अंग है, पूरक, कुंभक और रेचक वास्तव में प्राणायाम की  3 क्रियाएं हैं बाहर से भीतर की ओर स्वास खींचने को पूरक कहा जाता है उस श्वास को  निर्धारित समय तक रोके रखने की क्रिया को कुंभक कहते हैं और अंदर खींचते हुए श्वास को बाहर फेंकने की क्रिया को रेचक कहा जाता है |  कुछ योग शिक्षकों का कहना है  कि "तीनों क्रियाओं में समान समय लगना चाहिए" किंतु कुछ लोगों की मान्यता है कि "सांस लेने और सांस छोड़ने की क्रिया में समान समय लगे और श्वास रोकने की क्रिया में उससे दुगना समय लगना चाहिए अर्थात पूरक और रेचक में यदि 20 सेकंड लगे हो तो कुंभक में 40 सेकंड लगने चाहिए | 


 yoga 



प्राचीन ऋषि मुनि और हमारे धर्म ग्रंथो की माने तो प्रत्येक जिव की सांसे निर्धारित है | यदि कोई जिव अपनी सांसो को अव्यवस्थित रूप से व्यय करता है  तो वह जल्दी ही अपनी जीवन शक्ति गवांं कर मृत्यु को प्राप्त कर लेता है यदि वह प्राणायाम के द्वारा अपनी सांसो को नियंत्रित करके ध्यान लगाये तो उसकी प्रत्येक सांस की अवधि लम्बी हो जाती है | और वह इससे अपनी शारीरिक एवं मानसिक चेतना बढाकर अपने जीवन की निर्धारित सांसो को भी बढा सकता है 

एक साधारण मनुष्य एक मिनट में लगभग 18 से 20 बार साँस लेता है | योग और प्राणायाम के अभ्यास से सांसो में 5 से 10  प्रति मिनट की गिरावट आती है | 

सांसो की संख्या हमारे जीवन में निर्धारित है इसलिए यदि छोटे और जल्दी-जल्दी श्वास लिए जाते है तो कम समय में ही प्राणी अपने आप को मृत्यु की ओर अग्रसर करता है | 

प्राचीन ऋषि-मुनि प्राणायाम के माध्यम से लम्बे समय तक जीवन जीते थे ,और प्राणायाम के माध्यम से ही समाधी में चले जाते थे उस समय उनकी श्वास नहीं चलती थी इसलिए उनका शरीर काल के प्रभाव से अछुता रहता था |

क्या है प्राणायाम ?


प्राणायाम क्या है ? इस संबंध में बहुत प्रकार के मत है | लेकिन हम बात कर रहे है स्वास्थ के बारे में प्राणायाम  रक्त शोधक की एक  प्रक्रिया है |

प्राणायाम जानने से पहले प्राण शब्द को जानना होगा |  संस्कृत में प्राण शब्द की उत्पत्ति अन धातु से मानी जाती है अन धातु जीवनी शक्ति चेतना शक्ति वाचक है इस प्रकार प्राण शब्द का अर्थ चेतना शक्ति होता है | 

प्राण और जीवन प्रायःः एक ही शब्द में प्रयुक्त होता है |

प्राणायाम दो शब्दों से मिलक बना है | प्राण+आयाम =प्राणायाम  अर्थात एक प्राण और दूसरा आयाम | 

प्राण का अर्थ है जीवन तत्व और आयाम का अर्थ है विस्तार | प्राण शब्द के साथ प्रायः वायु को जोड़ा जाता है |
वायु का काम है नाक के द्वारा सांस लेने पर फेफड़ों में फैलना तथा उसके आँँक्सीजन अंश को रक्त के माध्यम से समस्त शरीर में पहुचाना यह प्रक्रिया शरीर को जीवित रखती है |   

जो नित्य नियमित रूप से प्राणायाम करता है उसको किसी प्रकार का रोग नहीं होता है यदि व्यक्ति प्राणायाम का अभ्यास करता है तो उसका रोग शीघ्र ही  दूर हो जाता है | 

 meditation



प्राणायाम कैसे करे ?

प्राणायाम का अर्थ है  शुद्धीकरण शारीरिक, मानसिक तथा प्राणिक तंतुओ के समूह का शोधन करना ही इसका उद्देश्य है |

 पद्मासन, सिद्धासन या वज्रासन या किसी भी ध्यान के आसन में आराम के साथ बैठकर मेरुदंड को सीधा रखें और आंखें बंद कर शरीर को स्थिर करने के बाद  दाएं हाथ मुद्रा बनाते हुए दाएं अंगूठे से दाहिनी नासिका को अनामिका उंगली से बायींं नासिका को बंद करने की स्थिति में लाइए अन्य उंगलियां ढीली रहेंगी  अब देखिए कि कौन सी नासिका से अधिक स्वास निकल रहा है मान लीजिए बायींं नासिका से अधिक  स्वास निकल रहा है, तो दाहिनी नासिका को बंद कर दीजिए फिर बायींं नासिका बंद करके दाहिनी नासिका से स्वास छोड़िए इसी क्रमानुसार दायींं  से स्वास लीजिए और वायु बायींं  से छोड़िये है | पुनः बायीं से  स्वास लीजिये और दाहिनी से छोड़िये | नए साधक को दस बार प्राणायाम करना चाहिए | 

प्राणायाम का अभ्यास करते समय इस बात का ध्यान रखे की स्वास लेने, रोकने और छोड़ने में 1:4:2  के अनुपात में करे | अर्थात आप स्वास लेने में 10 सेकंड लगाते हैं तो 40 सेकंड स्वास रोके तथा 20 सेकंड में धीरे-धीरे स्वास छोड़ें स्वास लेने की क्रिया को योग की भाषा में पूरक (Inhaling) कहते हैं और उस स्वास को रोकने की क्रिया को कुंभक ( Retention )कहते हैं तथा स्वास छोड़ने की क्रिया को रेचक (Exhaling) कहते हैं |

शरीर की समस्त नाड़ियों को शुद्ध करने के लिए तथा फेफड़ों को शुद्ध करने के लिए तथा फेफड़ों के विकार, मानसिक तनाव ,ब्लड प्रेशर आदि कष्टों को दूर करने के लिए प्राणायाम सर्वोत्तम है |


मंगलवार, 12 मार्च 2019

Honey for beautiful skin



सुन्दरता के लिए शहद का प्रयोग :-


शहद का सेवन करने से चेहरे का रंग निखर जाता है क्योंकि शहद का निर्माण ही गुलाब और फूलों के रस से होता है इसलिए उत्तम कोटि के साबुन ( Toilet Soap )में शहद डाला जाता है जिससे त्वचा की कोमलता और सुन्दरता में कमी ना रहे |

हमेशा शुद्ध शहद ही उपयोग करे नकली एवं बनावटी शहद का प्रयोग घातक सिद्ध हो सकता है | शहद की शुद्धता की पहचान के लिए आप हमारा यह लेख पड़ सकते है |

(असली शहद की पहचान कैसे करे)



 healthy honey with lemon




1 . चहरे को साफ़ पानी से धोएं और उसके बाद शुद्ध शहद का अपने चहरे पर लेप करे |  एक घंटे बाद साफ़ पानी से अपना चेहरा धो ले | आप अपने चेहरे पर एक नई चमक देखेंगे झुर्रिया ,मुहांसे और शिथिलता का निशान भी नहीं रहेगा |

2 . एक चम्मच शहद में आधे नींबू का रस मिलाकर खाना खाने से पहले चेहरे पर लगायें खाना खाने के बाद चेहरे को हल्के गरम पानी या बेसन लगाकर साफ़ करे आपके चेहरे पर जो बाल है वह भी साफ़ हो जायेंगे और एक नया ही नखार आ जायेगा |

3 . एक चम्मच शहद लेकर ऊँगली से निचे से ऊपर की ओर अपने चेहरे ,कान ,गर्दन पर लगाइए | ऐसा करने से आपके चेहरे पर खिचाव सा बना रहेगा | 30 मिनट के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो ले |यह उपाय प्रतिदिन दो माह तक करने से आपका चेहरा गोरा ,चिकना एवं सुन्दर हो जायेगा |

4 . शहद का लोशन भी घर पे बनाया जा सकता है | जिसे लगाने से आपकी त्वचा सुन्दर हो जाती है और आपकी त्वचा को पोषण भी मिलता है | लोशन बनाने के लिए एक  चम्मच मीठे बादाम रोगन का तेल और दो चम्मच शुद्ध शहद | दोनों को मिलाकर रख ले , अब अपने चेहरे को साफ पानी से धो लेंं फिर उस पर लोशन का लेप करे 30 मिनट बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो ले |

5 . एक बड़े चम्मच शहद में दो चम्मच दूध की मलाई मिलाकर देर तक फेंंटे अब इस लेप को अपने चेहरे पर हल्के हाथों से निचे से ऊपर की ओर मले और 15-20 मिनट तक अपने चेहरे की मसाज करे उसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा साफ़ करले ऐसा करने से चेहरे की झुर्रिया मिट जाती है और चेहरे पर एक निखार आ जाता है | 

6 . जिनकी त्वचा बहुत चिकनी एवं मुलायम होती है | उनके चेहरे पर कील ,मुहांसे ,दाने निकल आते है | इसके लिए एक चम्मच शहद में एक छोटे नींबू का रस मिलाकर लेप बना लेंं | इस लेप को सुबह-शाम अपने चेहरे पर लगायें | आपका चेहरा साफ़ हो जायेगा और कील-मुहांसों से भी राहत मिलेगी |

7 . अगर त्वचा जल-कट गई है तो शहद में जौंं का आटा या बेसन मिलाकर जली-कटी त्वचा पर लगायें | यह प्रयोग प्रतिदिन 20 दिन तक करे आपकी त्वचा पहले की तरह स्वस्थ हो जाएगी |

शहद खाने में तो स्वास्थ वर्धक है ही त्वचा के लिए एंटीसेप्टिक क्रीम से भी अधिक गुणकारी है | शहद के उपयोग से चेहरे के दाग-धब्बे तो मिट ही जाते है इसके प्रयोग से जख्म भी जल्दी भर जाते है |   

सोमवार, 11 मार्च 2019

How to identify pure honey



 आयुर्वेद में शहद के लाभों का उल्लेख कुछ इस प्रकार किया गया है :-

शहद सुकुमारता करने वाला स्त्रोत्रोंं को शुद्ध करने वाला ,कसैले रस सहित ,आहलाद कारक ,प्रसाद्जनक ,वर्ण को उज्वल करने वाला बुद्धिकारक ,वृष्य विषद ,रुचिकारक ,कोढ़ ,बवासीर ,खांसी ,कफ़ ,पित्त ,रक्त विकार ,प्रमेह ,ग्लानी कृमी और भेद ,वृषा ,वमन ,श्रवास ,हिचकी ,अतिसार ,मलबंध ,दाह , क्षत और क्षय इन सबको नष्ट करता है |   





 Honey 


शहद के गुण  :-

1 . दूध , अंडे, सेब , ताजे मटर की अपेक्षा शहर में कैलोरी इन सबसे अधिक होती है |

2 . शहद हर प्रकार के दूध से बढ़कर गुणकारी है |

3 . शहद में (amino acid ) अमीनो एसिड पाया जाता है , जो की फूल और पौधों से प्राप्त होता है ,इसमें औषध         गुण व बलवर्धक गुण होते है |

4 . खनिज लवण व शर्करा होने के कारण यह एक सम्पूर्ण आहार है |

5 . शहद में खनिज प्राकृतिक अनुपात में होने के कारण यह बहुत जल्दी शरीर में आत्मसात हो जाता है |

6 . शहद एक हल्का व प्राकृतिक रेचक भी है |

7 . बच्चों को जन्म से ही शहद देने से बहुत से रोग ठीक हो जाते हैं और बच्चे स्वस्थ बने रहते हैं कीटाणु व छूत           के प्रभाव से उनकी रक्षा होती है जन्म से ही बच्चों को शहद देकर कई बाल रोगों से बचाया जा सकता है |


असली शहद की पहचान कैसे करे :-

नैतिक स्तर पर गिरावट आने के कारण कई व्यक्तियों का ध्येय केवल धन कमाना ही रह गया है , ऐसे लोग किसी भी चीज में मिलावट करने से नहीं चूकते , शहद में भी ऐसे व्यक्तियों द्वारा नकली या मिलावटी बेचा जाता है , क्योंकि असली चीज का स्थान नकली चीज नहीं ले सकती , साधारणतः लोग असली और नकली शहद के बारे में नहीं जान पाते , अतः कई बार धोखा खा जाते हैं नीचे लिखी जानकारी से भविष्य में आपको असली और नकली शहद की पहचान हो सकती है |


1 . शुद्ध शहद पारदर्शी होता है कांच के गिलास में पानी भर कर उसमें शहद की एक बूंद टपकाएंं  यदि शहद तली में बैठ जाए तो शहद शुद्ध है और तली में पहुंचने से पहले ही घुल जाए या फैल जाए तो शहद अशुद्ध, मिलावटी,नकली है | 

2 . शीशे की प्लेट में धारबंद शहद टपकाने पर यदि उसकी सांप की जैसी कुंडली बन जाए तो शायद शुद्ध है |  मिलावटी शहद प्लेट में गिरते ही फैल जाता है |

3 . शुद्ध शहद देखने में पारदर्शी होता है जबकि मिलावटी शहद शुद्ध शहद की तुलना में कम पारदर्शी होता है  |
शुद्ध शहद में मक्खी गिर कर फसती नहीं बल्कि फड़फड़ा कर उड़ जाती है मिलावटी शहद में मक्खी फंसकर रह जाएगी काफी कोशिश के बाद भी वह उड़ नहीं सकेगी | शुद्ध शहद आंखों में लगाने पर थोड़ी जलन होगी पर चिपचिपाहट नहीं होगी और थोड़ी देर में आंखों में ठंडक का अनुभव होने लगता है | शहद की बूंदों को किसी धागे या लकड़ी पर टपका कर आग की लौ से स्पर्श कराने से पर यदि शहद जलने लगे तो यह शुद्ध है यदि ना जले तो वह मिलावटी शहद है |

4 . शुद्ध शहद यदि कुत्ते के सामने रख दिया जाए तो वह सूंघ कर छोड़ देगा जबकि मिलावटी शहद कुत्ता चाटने लगेगा |

5 . शुद्ध शहद सुगंधित होता है व ठंड में जम जाता है और गर्मी में पिघल जाता है जबकि मिलावटी शहद हर समय एक जैसा ही रहता है |

6 . शुद्ध शहद में रुई की बत्ती डुबोकर जलाने पर जलेगी |

7 . स्याही सोखता ( ब्लाटिंग पेपर ) या काटन ( रुई ) पर शहद डालने पर वह सोखेगा नहीं |



दोस्तों यह सभी उपाए असली और नकली शहद की पहचान करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है | 
आशा करते है की अब आप असली और नकली शहद को पहचानने में धोखा नहीं खायेंगे |


                                                                                            ( धन्यवाद )

रविवार, 10 मार्च 2019

Treatment of 8 kinds of diseases from potatoes

जी हां दोस्तों आज हम आपको आलू के बारे में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी देंगे जिनका आयुर्वेद में बहुत ही महत्व है |


  potatoes




आलू के बारे में सबसे पहले यह जान लेना चाहिए कि आलू विटामिन से भरपूर शुष्क और गर्म होने के साथ-साथ यह संपूर्ण आहार है और रोटी से पहले पचता है |
आलू के अंदर कैल्शियम,विटामिन बी, विटामिन सी एवं फास्फोरस बहुत मात्रा में पाए जाते हैं | जो लोग निरंतर आलू का प्रयोग करते हैं उनकी रक्त वाहिनी बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती है | तथा कठोर नहीं हो पाती इसलिए आलू खाकर लंबी आयु प्राप्त की जा सकती है |




बेरी-बेरी (Bery-Beri) :

बेरी -बेरी इस रोग में रोगी के चलने की शक्ति क्षीण हो जाती है | और वह चलने में असहाय हो जाता है | इस रोग में जंघागत नाड़ियों में क्षीणता का लक्षण विशेष रूप से होता है , इसके लिए आलू को पीस कर उसका रस निकाल लेंं , एक-एक चम्मच चरो समय रोगी को पिलायें तो रोगी को शीघ्र लाभ होगा |

विटामिन सी का खजाना है आलू :

आलू में विटामिन सी काफी मात्रा में पाए जाते हैं | उबालकर हर रोज 250 ग्राम आलू खाने वालों के शरीर से विटामिन सी की कमी दूर हो जाती है  | वैसे यदि उसे भूल कर खाया जाए तो अधिक गुणकारी है |

रक्तपित (SCURVY ) दूर करता है आलू :

यह रोग केवल विटामिन सी की कमी के कारण ही होता है | इस रोग के लक्षण यह है | कि आरंभिक  स्टेज पर रोगी के मन और शरीर की शक्ति क्षीण हो जाती है | उसका शरीर दुबला तथा चेहरे का रंग पीला पड़ जाता है थोड़ा सा काम करने पर ही उसकी सांस फूलने लगती है, शरीर पर मोटे मोटे दाने निकलते हैं, मसूड़े सूज जाते हैं उनमें से खून आने लगता है, धीरे-धीरे जैसे यह रोग बढ़ता है,तो रोगी की मांसपेशियां विशेष प्रमारक पेशियों से रक्त स्राव होकर उनमें वेदना युक्त तथा स्पर्शक्षम ग्रंथियां भी बन जाती हैं | हृदय-मांंस में भी स्राव होकर हृदय दर्द का रोग बन जाता है, नासिका आदि में भी खुला स्राव हो  सकता है, CARIES और पूथस्राव भी बह सकता है, यह सब कुछ विटामिन सी, की कमी के कारण ही होता है | इसका सबसे सरल और सस्ता उपचार यही है, कि आप हर रोज कच्चे आलू खाना प्रारंभ कर दें |

नील पड़ना :

कभी -कभी शरीर पर चोट लगने से नील से पड़ जाते है ,नील वाली जगह पर कच्चा आलू पीस कर लगा देंं |
इससे यह नील दूर हो जायेंगे |

जलने पर आलू से करे उपचार :

जली हुई त्वचा पर आलू पीसकर लगा देने से जलन दूर हो जाती है, और शरीर पर छाले भी नहीं पड़ते, यदि कोई प्राणी तेज धूप और लू के कारण झुलस गया हो तो उसके शरीर पर आलू का रस अच्छी तरह से रुई से लगा दें |

घुटने के दर्द के लिए लाभकारी है आलू :

घुटनों में किसी प्रकार का दर्द हो या सूजन आ गई हो, तो कच्चे आलू को पीसकर उस पर लेप करते रहे कुछ ही दिनों में आपका दर्द दूर हो जाएगा |

पथरी के लिए उपयोगी है आलू :

पथरी रोग के नाम से ही लोग डरते हैं ,क्योंकि इससे गुर्दों  में भी दर्द होने लगता है | ऐसे रोगी को आलू भूनकर सुबह शाम दोपहर खिलाते रहने से यह रोग 40 दिन में ठीक हो जाता है |

चर्म रोग में लाभकारी है आलू :

जिस रोगी के शरीर पर लाल फुंसियां निकल आई हैं , इनके कारण बुखार भी हो गया हो , ऐसे रोग का इलाज करने के लिए आलू को पीसकर फुंसियों वाली जगह पर अच्छी तरह से लगा दे |

शनिवार, 9 मार्च 2019

Pineapple is the medicine of how many diseases



कितने रोगों की दवा है अनन्नास :

जी हां, दोस्तों एक अकेला अनन्नास कई रोगों का उपचार कर सकता है | इसमें कोई संदेह नहीं कि अनन्नास से हाई ब्लड प्रेशर, दमा, खांसी, मासिक धर्म की गड़बड़ी  जैसे कई सारे रोग ठीक हो सकते हैं |

जी हाँँ दोस्तों अनन्नास यह एक ऐसा फल है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो चुका है | वैसे तो प्रकृति ने हमें जितने भी फल दिये है | वह सभी हमारे स्वास्थ्य के लिए गुणकारी और लाभदायक है |


 Pineapple





 (😅😥😣😭 सिर्फ हमारे कर्मो का फल छोड़कर क्योकि वह तो हमने स्वम् बनाया है | इसीलिए उसमें स्वाद भी सभी तरह के हैं खट्टे भी हैं मीठे भी हैं नमकीन भी हैं जो हमें अच्छे बुरे सभी तरह के कर्मों का फल देते हैं )

 अनन्नास:

अनन्नास के रस में प्रोटीन युक्त पदार्थों के पचाने की क्षमता है | इसमें से पसीने से मिलता-जुलता एक (bromelain) नामक तत्व निकलता है जो मानव शरीर के अनेक रोगों को जड़ से ख़त्म करता है |

गले की सूज़न :

 जो लोग गले की सूजन (tonsil ) रोग से प्रभावित हैं | उनके लिए सबसे अच्छी दवाई यही है कि वह अनन्नास को छीलकर दिन में 3 बार इसे खाते रहें इससे उनका गला ठीक हो जाएगा |

रोहिणी  (diphtheria) रोग  : 

 इस रोग से बचने के लिए अनन्नास का रस निकालकर दिन में तीन चार बार तीन-तीन घंटे के पश्चात देने से रोहिणी की झिल्ली कट जाती है | और गला साफ हो जाता है | ताजा अनन्नास के पेपसीन ( पित्त का एक प्रधान ) अंश होता है | इससे गले के रोगों को काफी लाभ होता है |


फोड़े फुंसिया एवं चर्म रोग :

अनन्नास का गूदा निकाल कर उसे कूट-पीसकर मरहम की शक्ल में बनाकर फोड़े-फुंसियों एवं अन्य चर्म रोग वाले स्थान पर लगा देने से काफी लाभ होता है |
 खारश में भी आराम मिलता है |
 सूजन वाले स्थान पर लगाने से सूजन चले जाती है |

शुक्रवार, 8 मार्च 2019

Do you know about these qualities of apple


 क्या आप जानते है ? सेब से कैसे ठीक होते है चर्म रोग ,गठिया रोग,दिल की कमजोरी ,पथरी ,जैसे जटिल रोग 

सेब हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना लाभकारी है ,यह आप सभी जानते है , सेब हमारे जीवन के लिए किसी अमृत से कम नहीं है | आयुर्वेद ने भी मानसिक तनाव ,चर्म रोग ,गठिया जैसे अनगिनत रोगों का अंत सेब से ही किया है|ऐसे ही कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे हम आपको बता रहे है , ताकि आप इनसे कुछ लाभ प्राप्त कर सके |


 apple




मानसिक तनाव ,चर्म रोग ,गठिया रोग :

ऐसे रोगों में प्रति दिन सुबह खाली पेट दो सेब खाने से यह रोग जड़ से ख़त्म हो जाते है और शरीर में नए खून का संचार होता है , नयी शक्ति आती है , शरीर भी हमेशा उर्जावान रहता है , शरीर में चुस्ती-स्फूर्ति बनी रहती है |

दांत रोग :

अगर आपको ऐसा महसूस हो की आपके दांत गलने लग गए है | या दाढ़ में गड्डे पड़ गए हो और आपको खाना खाने में परेशानी होती है |

नज़ला,जुखाम :

सर्दी जुखाम वैसे तो आम बात है |  जब मौसम बदलता है तब सर्दी जुकाम का होना एक आम बात है |लेकिन बहुत से ऐसे भी इन्सान है जिन्हें सर्दी जुखाम जैसे रोग हमेशा घेरे रहते है | ऐसे रोगियों को खाना खाने से पहले बिना छीले एक सेब प्रतिदिन खाना चाहिए  |

दिल की कमज़ोरी :

अगर आपको भी अपना दिल स्वस्थ रखना है | तब आपको सेब का मुरब्बा एक नग प्रतिदिन खाना चाहिए सेब का मुरब्बा दिल के लिए बहुत ही फादेमंद है | जिन लोगों के दिल में किसी प्रकार की कोई समस्या हो उन्हें सेब का मुरब्बा गाय के दूध के साथ लेना चाहिए |

स्मरण शक्ति बढ़ाता है सेब:

जिन लोगों को भूलने की बीमारी हो अथवा जिनकी स्मरण शक्ति कमजोर हो | ऐसे लोगों के लिए सेब एक प्राकृतिक उपहार है | ऐसे लोगो को एक नग अम्बरी सेब छीलकर ,एक गिलास गाय के दूध के साथ प्रतिदिन खाना चाहिए | इससे दिमागी शक्ति प्रबल होती है | पढ़ने वाले बच्चों के लिए यह बहुत फायदेमंद है |


पथरी में सेब के फायदे  : 

आज पथरी रोग के कारण अनेक लोग चिंतित हैं क्योंकि इस रोग के कारण इंसान को पेट के रोग तो लगते ही हैं इसके साथ गुर्दे पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है डॉक्टरों के पास तो इस रोग का एक ही इलाज है वह है ऑपरेशन और मेरे विचार में तो यह अंतिम इलाज ही हैं इसके पश्चात कोई और इलाज नहीं है | परंतु इससे पहले तो अनेक इलाज है |
 ऐसे रोगियों को हर रोज सेब का रस खाली पेट लेना चाहिए जिन लोगों को पथरी रोग नहीं भी हो, वह भी यदि सेब का रस का सेवन करते हैं , तो वह भविष्य में पथरी रोग से बचे रहेंगे |

बच्चों के पेचश :

अक्सर बच्चों को पेचश रोग लगा ही रहता है | कुछ बच्चों को तो दूध पीते ही उल्टी और दस्त आने लगते हैं | ऐसे बच्चों का दूध बंद करके थोड़े समय के पश्चात ही सेब का रस एक एक घंटे के पश्चात् देते रहे | इससे यह रोग जड़ से जाता रहेगा |

Liver -जिगर और गैरा :

यह रोग बहुत फैला हुआ है | जो लोग इन रोगों से बचने का प्रयास पहले से नहीं करते  वह अपने लिए स्वयं दुख खरीदने का कारण बनते हैं  | यदि वह हर रोज सुबह दो सेब तथा खाना खाने के पश्चात एक एक सेब लेते रहें तो यह दोनों रोग ठीक हो जाएंगे उनके शरीर में नयी शक्ति आएगी तथा नए खून का संचार होगा |

भूख ना लगना :

जिन लोगों को भूख नहीं लगती ऐसे लोगों को एक गिलास खट्टे सेब के रस में कुंजा मिश्री मिलाकर प्रतिदिन पीना चाहिए |

गुरुवार, 7 मार्च 2019

Use of papaya for stomach disease



अगर आप भी है अपने पेट से परेशान तो करे इसका सेवन जाने कैसे ? 

 papaya

पपीता एक ऐसा फल है जो हमारे पेट के रोगों के लिए सर्वाधिक लाभदायक है | जो लोग पेट के रोगों से अधिक परेशान हैं अथवा जिन लोगो को पुराने पेट के रोग हैं  | उन रोगियों के लिए पपीता वरदान सिद्ध होगा |

प्रयोग :

 एक पका हुआ पपीता लेकर उसका बारीक छिलका उतार दें | फिर उसके अंदर के काले बीजों को भी निकाल कर फेंक दे | अब इसके छोटे-छोटे टुकड़े काट कर उन पर काला नमक, काली मिर्च डालकर ऊपर से नींबू निचोड़ कर आनंद से नाश्ते के स्थान पर खाएं ठीक एक माह तक इसे निरंतर खाते रहने से पेट के सारे रोग समाप्त हो जायेंगे भूख भी खूब लगेगी |

पुरानी कब्ज के रोगी तो इसे दिन में 3 बार गाय के दूध के साथ ले तो उन्हें अधिक लाभ होगा |

बुधवार, 6 मार्च 2019

Is banana consumption preventable from heart disease


क्या प्रतिदिन केले के सेवन से दिल के  दौरे की संभावना कम हो जाती है ?

आज लगभग सभी देशो में केला फल प्रेमियों की पसंद बन चुका है | यह लगभग  70 से 80 करोड़ लोगों के दैनिक आहार की जरूरत बन चुका है |  इसे भिन्न -भिन्न भाषाओं में भिन्न - भिन्न नामों से पुकारा जाता है | जैसे -  संस्कृत में भानुफल ,कदली फल और  बंगला में केली कहा जाता है |


 heart diseases



 केले की ढाई सौ से अधिक प्रजातियां हैं |  एक केले में लगभग  400 मिलीग्राम पोटेशियम पाया जाता है जो कि एक गिलास संतरे के रस से मिलता है विभिन्न शोध बताते हैं कि पोटेशियम युक्त फलों के सेवन से दिल के दौरे की संभावना 30% तक कम हो जाती है |

 यह दुनिया भर के खिलाड़ियों का पसंदीदा फल है | इसमें विटामिन सी विटामिन बी  कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन,  पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है | केले को गैस्ट्रिक ,अल्सर व डायरिया में उपयोगी माना जाता है | आयुर्वेद में केले को ठंडा और भूख बढ़ाने वाला पौष्टिक फल माना गया है |

 Banana



 केले के पेड़ का हर तत्व मूल्यवान होता है केले के तने से रेशा बनता है और इसके पत्ते भोजन करने के काम आते है इसके पत्ते छत बनाने के काम भी आते है | केले की जड़ भी बहुत काम आती है |

 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की जन्म पत्री में गुरूवार ख़राब हो तो उस व्यक्ति को पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है | लेकिन पुखराज बहुत महंगा आता है | जिसे खरीदना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं है | इसके लिए वह व्यक्ति केले की जड़ को विधि-विधान से धारण कर सकता है | केले की जड़ भी पुखराज जैसा ही काम करती है |

 पूरे भारत वर्ष में केले की पैदावार होती है | लेकिन केले की सबसे अच्छी और ज्यादा पैदावार मध्यप्रदेश ,गुजरात ,आंध्रप्रदेश ,कर्नाटक ,महाराष्ट्र और तमिलनाडु  में होती  है | हमारे देश भारत से लगभग 40 से भी अधिक देशो     को केला निर्यात किया जाता है |


हमारा भारत देश केले के उत्पादन में पहले स्थान पर है | केले में अनेक गुण होते है केला गर्म और नमी वाले क्षेत्र में पैदा होता है | केले का छिलका इतना मोटा होता है की केला काफी समय तक सुरक्षित रहता है यही कारण है की इसका छिलका अगर काला पड़ जाता है तब भी केला अन्दर से ख़राब नहीं होता है | केले को कच्चा ही तोड़ लिया जाता है यह सामान्य तापमान पर भी पक जाते है | केले में फ्रेक्टोज ,सुफोज और ग्लूकोज भरपूर मात्रा में होता है जो जल्दी पचकर हमारे खून में पहुच जाता है और इससे हमें तुरंत ऊर्जा मिलती है | स्पोर्ट्स मेन ताकत और ऊर्जा पाने के लिए केले का सेवन करते है |  केला आसानी से पच जाता है इसलिए छोटे बच्चो को यह खिलाया जाता है | दस्त लगने पर भी केले का सेवन लाभदायक होता है यह पेट के अल्सर में बहुत लाभदायक होता है | एक केले में लगभग 90 से 100 तक कैलोरीज होती है इसमें 0 .5 प्रतिशत वसा होती है | इसलिए मोटापा कम करने में यह बहुत फायदेमंद है |   

सोमवार, 4 मार्च 2019

anal fistula treatment by guava


अमरुद -GUAVA:

फल चाहे कोई भी हो हमारे शरीर को स्वथ्य रखने में सभी फल महत्वपूर्ण है | लेकिन आयुर्वेद की नज़र में हर फल का एक अलग ही महत्त्व है | जिनके बारे में " हम " आपको अपनी पिछले लेखों के माध्यम से अवगत करा ही चुके है | आज हम "अमरूद और अमरुद के पत्तो" के आयुर्वैदिक गुणों बारे में चर्चा करेंगे | कि  "अमरूद और अमरूद के पत्ते " किन-किन रोगों में लाभदायक है |


  Guava





गुदा रोग मैं अमरूद का महत्व :

 यह एक ऐसा रोग है जिसे बताते हुए कुछ लोग काफी संकोच करते हैं परंतु डॉक्टरों के सामने कैसा संकोच ?   यदि आप डॉक्टर से ही संकोच करेंगे तो आप का इलाज ही कौन करेगा ?

 इसलिए मैं हर रोगी को यही सलाह देता हूं कि वह रोग के बारे में अपने वैद्य ,हकीम ,डॉक्टर से कुछ ना छुपाएंं  | 
गुदा रोग बहुत बुरा रोग है, क्योंकि कई लोगों को इस रोग के कारण शौच (latrine)करते समय गुदा को बाहर निकल आने पर काफी कष्ट होता है | इस रोग का इलाज सबसे पहले आयुर्वेद ने निकाला था |
 ऐसे रोगी अमरूद के पत्ते लेकर उन्हें पीसकर चटनी की भांति बना लें फिर रात को सोते समय गुदा द्वार पर उसका लेप कर के सो जाएं  | 
40 दिन प्रतिदिन ऐसा करने पर यह रोग जड़ से समाप्त हो जाएगा |

मस्तिष्क के लिए अमरूद का उपयोग:

जिन लोगों के दिमाग पर अक्सर बोझ रहता है | उन्हें चाहिए कि सुबह शाम दोनों समय ढाई सौ ग्राम अमरुद लेकर उनको काटकर छोटे-छोटे टुकड़े बना लें | इसके ऊपर काला नमक, काली मिर्च और नींबू का रस डालकर आनंद से खाते रहें इससे मानसिक तनाव दूर हो जाएगा |

फोड़े फुंसी एवं खुजली में अमरूद का उपयोग :

40 दिन तक प्रतिदिन दोपहर के समय ढाई सौ ग्राम अमरूद में काला नमक, काली मिर्च एवं  नींबू डालकर खाने से फोड़े फुंसियां समाप्त हो जाती हैं |

पुराने दस्त ( संग्रहणी ):

अमरूद के पेड़ की कोमल पत्तियाँ पानी में उबाल कर उसे छान लेंं | छने हुए पानी को  दिन में तीन से चार बार आधा -आधा गिलास पिने से पुराने से पुराने दस्त संग्रहणी रोग ठीक हो जाता है |

महत्वपूर्ण बात :

अमरूद के अन्दर " टेनिक एसिड" होता है , जो हमारे शरीर के अन्दर घाव भरने में महत्वपूर्ण माना गया है |इसलिए पेट की अंतड़ियों के घाव भरने में अमरुद अति उपयोगी है |   

रविवार, 3 मार्च 2019

hot wind diseases and prevention


लू लगना   (Hot wind):

गर्मी शुरू होने वाली है और लू से बचाव बेहद जरुरी है लू लगने पर बेचैनी व घबराहट महसूस होती है उल्टी एवं दस्त होने लगते है तथा ताप चढ़ जाता है देसी नुस्खो की मदद से लू से बचा जा सकता है |

 treatments


  • जौ का आटा और उसमे प्याज पीसकर मिला ले इसका शरीर पर लेप करने से लू से तुरंत राहत मिलती है | 
  • लू लगने से शरीर मे जलन होने पर जौ के आटे में पानी मिला कर पतला सा लेप बना ले इसे पुरे शरीर पर लगाने से तुरंत राहत मिलाती है |
  • प्याज का रस कनपटियो और छाती पर मलने से लू नहीं लगती |खाने के साथ प्याज का सेवन बहुत लाभदायक है |
  • लू से ताप हो जाने पर इमली को पानी के साथ उबालकर ठंडा होने दे फिर उसे छान ले अब इसे शर्बत की तरह पिये अतः उस पानी में किसी कपडा भिगो कर रोगी पर छीटे मारने से लू के ताप मे तुरंत आराम मिलता है |
  • गर्मी में घर से बहार निकलने से पहले  तुलसी के पत्तो के रस मे हल्का सा काला नमक मिला कर सेवन करने से लू नहीं लगती प्यास भी कम लगती है और पसीना भी नहीं आता |
  • इमली के गुदे को हाथ और पैरो के तलवो पर मलने से लू का असर समाप्त हो जाता है |
  • खरबूजे के बीजो को पीसकर सिर तथा शरीर पर लेप करने से एवं इनकी ठंडाई बनाकर पीने से लू में तुरंत राहत मिलती है |
  • हरे नारियल के दूध के साथ काले जीरे को पीसकर शरीर पर मलने से लू लगने पर होने वाली बैचेनी एवं घबराहट दूर होती है |

  

शनिवार, 2 मार्च 2019

What is the health benefits of asafetida?



क्या आप जानते है हींग हमारे स्वस्थ शरीर और स्वस्थ दिमाग के लिए कितनी महत्वपूर्ण है ?

भारतीय रसोई में हींग का उपयोग एक मसाले के रूप में किया जाता है | ज्यादातर हींग का इस्तेमाल तड़का लगाने के लिए किया जाता है | हींग हमारे का व्यंजन का स्वाद तो बढाती ही है, साथ ही यह हमारी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है | आयर्वेद में हींग को उत्तम स्थान दिया गया है | तो जानते है  हींग के कुछ ऐसे ही चमत्कारी प्रयोग के बारे में जिनसे हम अपनी सेहत को कैसे स्वस्थ रख सकते है |


Asafoetida 






स्मरण शक्ति  -

कई लोगो की स्मरण शक्ति बहुत कमजोर होती है | ऐसे में प्रतिदिन हींग का सेवन करे आप जो भी सब्जी अथवा दाल बनाए उनमे हींग अवश्य डाले | इस तरह हींग का सेवन करने से स्मरण शक्ति तेज होती है |

 हिचकी -

हिचकी भी  एक बीमारी है कई बार हिचकी इस तरह आती है कि बंद होने का नाम ही नहीं लेती ऐसे में हिचकी की समस्या से आराम पाने के लिए एक केले में थोड़ी सी हींग डालकर खाने से हिचकी में तुरंत लाभ मिलता है |

पेट की समस्या -

अगर आपको पेट से सम्बंधित कोई शिकायत है | तो इसमें हींग का सेवन बहुत ही लाभदायक है |रोज सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकी भर हींग डालकर पिने से पेट से सम्बंदित रोगों में लाभ मिलता है | और साथ ही आपके शरीर की इम्युनिटी पावर भी मजबूत होती है |

त्वचा रोग -


 अगर आपकी त्वचा पर किसी तरह का इन्फेक्शन  है | तो उससे छुटकारा पाने के लिए पानी में थोड़ी सी हींग डालकर पेस्ट बना ले और उस पेस्ट को इन्फेक्शन बाली जगह लेप करे ऐसा करने से आपको स्किन  इन्फेक्शन की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा | 

शुक्रवार, 1 मार्च 2019

lemon is miraculous medicine


क्या सच में नींबू में चमत्कारी गुण है ?

नींबू एक गुण अनेक जी हां दोस्तों यह कहावत नहीं हकीकत है एक छोटे से  नींबू में इतने सारे गुण छुपे हुए हैं कि शायद हमें पता ही नहीं होगा | आयुर्वेद में तो नींबू का बहुत ही महत्व है | तो चलिए जानते है एक साधारण से नींबू की असाधारण शक्तियों के बारे में |


 lemon tea 




नींबू है शक्तिवर्धक

एक गिलास गर्म पानी में नींबू का रस डालकर निरंतर पीते रहने से शरीर में नई शक्ति का संचार होता है , नजर भी तेज़ हो जाती है , मानसिक तनाव से छुटकारा मिलता है ,मानसिक कमजोरी दूर होती है ,सिर दर्द दूर हो जाता है ,अधिक काम करने के लिए शरीर में थकावट नहीं आती |
इसमें चाहे तो 5 -6 बूंद शहद की मिला सकते है | शक्कर और नमक का अधिक प्रयोग ना करे |

नींबू में है विटामिन सी का खज़ाना 

कई प्रकार के रोगों से बचने के लिए ,और शारीरिक शक्ति पाने के लिए नींबू का रस विटामिन सी का खज़ाना है |
रक्त स्राव ,दांतों के रोग पायरिया, काली खांसी ,दमा आदि जैसे रोगों से बचने के लिए नींबू का बहुत बड़ा योगदान है |

खून की कमी दूर करता है नींबू  

जिन लोगो के शरीर में खून की कमी हो जाती है ,शरीर दिन प्रति दिन कमजोर होता जाता है ,किसी काम को करने का मन नहीं करता | ऐसे लोगो को नींबू का रस और टमाटर का रस मिला कर देने से कमजोरी दूर हो जाती है |

पाचंंन शक्ति बढाता है नींबू 

पाचंंन शक्ति जब कम हो जाती है तो उसके साथ ही भूख लगना भी कम हो जाती है ,जिसकी वजह से शरीर में अनेक प्रकार की कमजोरियांं आ जाती है , नींद नहीं आती ,बैचेनी रहती है | ऐसे व्यक्ति को एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस डालकर प्रतिदिन सुबह शाम पिलाने से सब रोग दूर हो जाते है |

पुरानी से पुरानी कब्ज़ दूर करता है नींबू  

कब्ज़ सब बीमारियों की जननी है | इससे हर समय बचे रहना चाहिये | कब्ज़ के रोगियों को यही सलाह दी जाती है की वह दो नींबू के रस में दो चम्मच चीनी मिलाकर पी जाए | शीघ्र ही आराम मिलेगा |